Sunday, July 28, 2019

जीवन - अकेलेपन से एकांत की ओर एक यात्रा





अकेलापन' इस संसार में सबसे बड़ी सज़ा है।
और 'एकांत'- इस संसार में सबसे बड़ा वरदान। 

ये दो समानार्थी दिखने वाले शब्दों के अर्थ में आकाश -पाताल का अंतर है। अकेलेपन में छटपटाहट है तो एकांत में आराम है। अकेलेपन में घबराहट है तो एकांत में शांति। जब तक हमारी नज़र बाहर की ओर है तब तक हम अकेलापन महसूस करते हैं और जैसे ही नज़र भीतर की ओर मुड़ी (आध्यात्मिक) तो एकांत अनुभव होने लगता है। 

ये जीवन और कुछ नहीं वस्तुतः अकेलेपन से एकांत की ओर एक यात्रा ही है, ऐसी यात्रा जिसमे रास्ता भी हम हैं, राही भी हम हैं और मंज़िल भी हम ही हैं...!!

Monday, May 6, 2019

संसार चक्र से मुक्ति



लिंग शरीरधारी जीव प्रारब्धवश लोक-लोकांतर में,यात्री की भांति भ्रमण करते हुए, विभिन्न चोला धारण करता है । 

जब शरणागत जीव लिंग शरीर से तादात्म्य छोड़कर आत्मा में प्रवेश करता है,तब लिंग शरीर के अवयव प्रकृति में लय कर जाते हैं। 

जीव संसार चक्र से मुक्त हो आनंदित हो उठता है।